प्राचीन काल के प्रमुख वंश,

जैसा कि आप सबको ज्ञात है कि आगामी CTET परीक्षा 21st फरवरी 2016 को आयोजित होगी। परीक्षा पास करने के लिए सामाजिक विज्ञान एक महत्वपूर्ण विषय है, इस विषय में अच्छे मार्क्स लाने के लिए आपको इस विषय के महत्वपूर्ण टॉपिक अच्छी तरह से तैयार करने होंगे। पेपर 2 में कुल 60 प्रश्न सामाजिक विज्ञानं से पूछे जाएंगे। जिनमे से लगभग 10 -15 प्रश्न इतिहास ( history ) से पूछे जाएंगे। हिस्ट्री में आपको अच्छे मार्क्स लाने के लिए  प्राचीन भारत का इतिहास, माध्यमिक भारत का इतिहास और आधुनिक भारत का इतिहास आदि टॉपिक्स को तैयार करना होगा।
आपकी बेहतर तैयारी के लिए हम कुछ स्टडी नोट्स आपको उपलब्ध करा रहे है , उम्मीद है कि ये स्टडी नोट्स आपको सफल बनाएँगे। आज का विषय है – प्राचीन काल के प्रमुख वंश 
Study notes CTET
महाजनपदों का विकास
  • ईसा – पूर्व छठी सदी से पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बिहार में लोहे का व्यापक प्रयोग हुआ। इसने ‘जनपद’ राज्यों के निर्माण हेतु उपयुक्त परिस्थिति बनाई। बुद्ध के समय 16 बड़े-बड़े राज्य थे। ये ‘महाजनपद’ कहलाते थे।
  • मगध, कोसल, वत्स तथा अवन्ति; चार सर्वाधिक शक्तिशाली महाजनपद थे।
  • सोलह महाजनपदों में केवल ‘अश्मक’ ही दक्षिण भारत में स्थित था।
  • अश्मक, गोदावरी के किनारे अवस्थित था।
  • बुद्ध काल का सबसे शक्तिशाली गणराज्य ‘वैशाली का लिच्छवी’ था।
मगध साम्राज्य की स्थापना व विस्तार
हर्यक वंश
  • बिम्बिसार’, हिरण्यक या हर्यक वंश का संस्थापक माना जाता है।
  • बिम्बिसार, बुद्ध के समकालीन था।
  • मगध की असली शत्रुता अवन्ति से थी, जिसकी राजधानी उज्जैन में थी।
  • अवन्ति के राजा चण्डप्रद्योत महासेन की बिम्बिसार से लड़ाई हुई थी, किन्तु दोनों ने अन्त में दोस्त बन जाना ही उपयुक्त समझा। बाद में जब प्रद्योत को पीलिया रोग हो गया तो बिम्बिसार ने अवन्तिराज के अनुरोध पर अपने राजवैद्य ‘जीवक’ को उज्जैन भेजा था।
  • मगध की पहली राजधानी राजगीर में थी उस समय इसे ‘गिरिव्रज‘ कहते थे। यह स्थल पाँच पहाडि़यों से घिरा हुआ था।
  • बिम्बिसार के बाद उसका पुत्र अजातशत्रु (492-460 ई. पू.) सिंहासन पर बैठा। अजातशत्रु ने अपने पिता की हत्या करके सिंहासन पर कब्जा किया था।
  • अजातशत्रु ने कोसल और वैशाली को मगध में मिलाया.
  • अजातशत्रु ने राजगीर की किलेबन्दी की।
  • अजातशत्रु के बाद उसका पुत्र उदयिन् (460-444 ई. पू.) मगध की गद्दी पर बैठा।
  • उदयिन् शासन की महत्त्वपूर्ण घटना यह है कि उसने पटना में गंगा और सोन के संगम पर एक किला बनवाया। इसका कारण यह था कि पटना मगध साम्राज्य के केन्द्र भाग में पड़ता था।
  • उदयिन् के बाद शिशुनागों के वंश का शासन शुरू हुआ।
  • वे राजधानी को कुछ समय के लिए वैशाली ले गए।
नंद वंश
  • शिशुनागों के बाद नन्दों का शासन शुरू हुआ। ये मगध के सबसे शक्तिशाली शासक सिद्ध हुए।
  • नन्दों ने कलिंग को जीतकर मगध की शक्ति को बढ़ाया। विजय के स्मारक के रूप में वे कलिंग से ‘जिन’ की मूर्ति उठा लाए थे। ये सभी घटनाएँ ‘महापद्मनन्द’ के शासनकाल में घटित हुईं। उसने अपने को ‘एकराट’ कहा है।
मौर्यवंश
चन्द्रगुप्त मौर्य-   323-295 ईसा-पूर्वप्रमुख मौर्य शासक
बिन्दुसार     –   298-272 ईसा-पूर्व
अशोक       –   273-232 ईसा-पूर्व
  • मौर्य राजवंश की स्थापना चन्द्रगुप्त मौर्य ने की।
  • चन्द्रगुप्त ने पश्चिमोत्तर भारत को सेल्यूकस की गुलामी से मुक्त किया, जो सिन्धु नदी के पश्चिम में राज करता था। अन्त में, दोनों के बीच समझौता हो गया, और चन्द्रगुप्त से 500 हाथी लेकर उसके बदले सेल्यूकस ने पूर्वी अफगानिस्तान, बलूचिस्तान और सिन्धु के पश्चिम का क्षेत्रा दे दिया।
  • चन्द्रगुप्त ने एक विशाल साम्राज्य स्थापित कर लिया, जिसमें पूरे बिहार तथा उड़ीसा और बंगाल के बड़े भागों के अतिरिक्त, पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी भारत और दक्कन भी थे।
  • पाटलिपुत्रा, कौशाम्बी, उज्जैन और तक्षशिला चोटी के नगर थे।
सम्राट् अशोक
  • बिन्दुसार का पुत्र अशोक मौर्य राजाओं में सबसे महान हुआ।
  • बौद्ध परम्परा के अनुसार, अशोक अपने आरम्भिक जीवन में परम क्रूर था और अपने 99 भाइयों का कत्ल करके राजगद्दी पर बैठा। अशोक पहला भारतीय राजा हुआ जिसने अपने अभिलेखों के सहारे सीधे अपनी प्रजा को सम्बोधित किया।
  • प्राकृत में रचे ये अभिलेख साम्राज्य भर के अधिकांश भागों में ब्राह्मी लिपि में लिखित हैं।
  • किंतु पश्चिमोत्तर भाग में ये खरोष्ठी और अरामाईक लिपियों में हैं और अफगानिस्तान में इनकी भाषा और लिपि अरामाईक और यूनानी दोनों है।
  • अशोक के अभिलेख सामान्यतः प्राचीन राजमार्गों के किनारे स्थापित थे।
  • राजगद्दी पर बैठने के बाद अशोक ने केवल एक युद्ध किया, जो ‘‘कलिंग युद्ध’’ के नाम से प्रसिद्ध है।
  • अशोक के अपने कथन के अनुसार इस युद्ध में 100,000 लोग मारे गए, कई लाख बरबाद हुए और 150,000 बन्दी बनाए गए।
  • अशोक ने पश्चिम एशिया और यूनानी राज्यों में अपना शान्तिदूत भेजा।
  • अशोक ने श्रीलंका और मध्य एशिया में बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए अपना धर्मप्रचारक भेजा।
  • अशोक ने विजय के बाद कलिंग को अपने कब्जे में रखा और अपने साम्राज्य में मिला लिया।
  • अपने साम्राज्य के भीतर अशोक ने एक तरह के अधिकारियों की नियुक्ति की जो रज्जुक या लजुक कहलाते थे और इन्हें प्रजा को न केवल पुरस्कार ही बल्कि दंड देने का भी अधिकार सौंपा गया था।
  • कन्धार अभिलेख से मालूम होता है कि अशोक की नीति की सफलता बहेलियों और मछुआरों पर भी हुई और उन्होंने जीव-हिंसा को त्याग कर और सम्भवतः स्थिरवासी होकर कृषक का जीवन अपना लिया।
  • धर्म का प्रचार करने के लिए ‘धर्ममहामात्रा’ बहाल किए। अपने साम्राज्य में न्याय-कार्य करने के लिए अशोक ने ‘रज्जुकों’ की भी नियुक्ति की।
  • अशोक कर्मकाण्डों का, विशेषतः महिलाओं में प्रचलित अनुष्ठानों या रस्मों का विरोधी था।
  • अशोक ने कई तरह के पशु-पक्षियों की हिंसा पर रोक लगा दी और उसकी राजधानी में तो प्राणी को मारना पूर्णतः निषिद्ध था।
  • देश के एकीकरण में अशोक ने ब्राह्मी, खरोष्ठी, अरामाईक और यूनानी सभी लिपियों का सम्मान किया।
  • अशोक ने ‘बराबर की पहाडि़यों’ में कुछ गुफाएँ आजीवकों को दान में दी।
  • अशोक के अभिलेखों में उसकी एक मात्रा ‘रानी कारूवाकी’ का उल्लेख प्राप्त होता है।
  • ‘पुराण’ के अनुसार अशोक के बाद गद्दी पर ‘कुणाल’ बैठा।
  • अशोक की मृत्यु 232 ई. पू. में हुई।
मौर्य शासन
  • ‘कौटिल्य’ ने राज्य के ‘साप्तांग सिद्धांत’ की व्याख्या की।
  • कौटिल्य ने राजा को सलाह दी है कि जब वर्णाश्रम-धर्म (वर्णों और आश्रमों पर आधारित समाज-व्यवस्था) लुप्त होने लगे तो राजा को धर्म की स्थापना करनी चाहिए।
  • कौटिल्य ने राजा को धर्मप्रवर्तक अर्थात् सामाजिक व्यवस्था का संचालक कहा।
  • अशोक ने अपने अभिलेखों में बताया है कि राजा का आदेश अन्य आदेशों से ऊपर है।
  • ‘चन्द्रगुप्त मौर्य’ के समय प्रान्तों की कुल संख्या ‘चार’ थी।
  • ‘अशोक’ के समय कुल ‘पाँच’ प्रांत थे।
  • प्रांतीय शासक ‘कुमार’ कहे जाते थे।
  • प्रांत, ‘आहार’ या ‘विषय’ में विभक्त थे।
  • विषय का प्रधान ‘विषयपति’ कहलाते थे।
  • प्राचीन इतिहास के किसी भी अन्य काल में हम इतने सारे अधिकारियों को नहीं पाते जितने मौर्य काल में।
  • शीर्षस्थ अधिकारी ‘तीर्थ’ कहलाते थे।
  • अधिकतर अधिकारियों को नकद वेतन दिया जाता था।
  • उच्चतम कोटि के अधिकारी थे मंत्री, पुरोहित, सेनापति और युवराज, जिन्हें उदारतापूर्ण पारितोषिक मिलता था।
  • उन्हें 48 हजार पण की भारी रकम मिलती थी (पण 3/4 तोले के बराबर चाँदी का एक सिक्का होता था)।
  • सबसे निचले दर्जे के अधिकारियों को कुल मिलाकर 60 पण मिलते थे, हालाँकि कुछ कर्मचारियों को महज दस-बीस पण ही दिए जाते थे।
  • तीर्थों की कुल संख्या अठारह थी।
  • कौटिल्य के अर्थशास्त्र को आधार बनाएँ तो लगेगा कि राज्य में 27 अध्यक्ष नियुक्त थे। उनका कार्य मुख्य रूप से राज्य की आर्थिक गतिविधियों का नियमन करना था।
वास्तुकला
  • पत्थर की इमारत बनाने का काम भारी पैमाने पर मौर्यों ने ही आरम्भ किया।
  • ‘मेगास्थनीज’ ने कहा है कि पाटलिपुत्र स्थित मौर्य राजप्रासाद उतना ही भव्य था जितना ईरान की राजधानी में बना राजप्रासाद।
  • मौर्य शिल्पी पत्थर पर पालिश करने में दक्ष थे।
  • मौर्य शिल्पियों ने बौद्ध भिक्षुओं के निवास के लिए चट्टानों को काट कर गुफाएँ बनाने की परंपरा भी शुरू की। इसका सबसे पुराना उदाहरण है बराबर की गुफाएँ जो गया से 30 किलोमीटर की दूरी पर है।

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