स्टडी नोट्स – प्राचीन काल के प्रमुख धार्मिक आन्दोलन
 
जैसा कि आप सबको ज्ञात है कि आगामी CTET परीक्षा 21st फरवरी 2016 को आयोजित होगी। परीक्षा पास करने के लिए सामाजिक विज्ञान एक महत्वपूर्ण विषय है, इस विषय में अच्छे मार्क्स लाने के लिए आपको इस विषय के महत्वपूर्ण टॉपिक अच्छी तरह से तैयार करने होंगे। पेपर 2 में कुल 60 प्रश्न सामाजिक विज्ञानं से पूछे जाएंगे। जिनमे से लगभग 10 -15 प्रश्न इतिहास ( history ) से पूछे जाएंगे। हिस्ट्री में आपको अच्छे मार्क्स लाने के लिए  प्राचीन भारत का इतिहास, माध्यमिक भारत का इतिहास और आधुनिक भारत का इतिहास आदि टॉपिक्स को तैयार करना होगा।
आपकी बेहतर तैयारी के लिए हम कुछ स्टडी नोट्स आपको उपलब्ध करा रहे है , उम्मीद है कि ये स्टडी नोट्स आपको सफल बनाएँगे। आज का विषय है – प्राचीन काल के प्रमुख धार्मिक आन्दोलन
History study notes for ctet
प्राचीन काल के प्रमुख धार्मिक आन्दोलन 
उत्तर वैदिक काल में धार्मिक आडम्बर, रूढ़ीवाद तथा धार्मिक कर्मकांड में अत्यधिक वृद्धि हो गई थी जिसमें काफी संख्या में पशुओं की बलि दी जाती थी लेकिन उस काल तक उत्तर भारत के गांगेय प्रदेश (पूर्वी उत्तर प्रदेश एवं बिहार) के जनजीवन में सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से नगरीयकरण, शिल्प समुदाय के विस्तार, व्यवसाय और वाणिज्य में तीव्र विकास हो रहा था कृषि काफी उन्नत अवस्था में पहुँच गया था जो मुख्यतः पशुओं पर आधारित था. अतः परंपरागत रूढ़िवादिता तथा नए उभरते सामाजिक-आर्थिक वर्गों की आकांक्षाओं में होने वाले संघर्ष ने नवीन धर्मों के पनपने के लिए जमीन उपलब्ध कराया. इसके परिणामस्वरूप कई धार्मिक आन्दोलन हुए जिसमें जैन, बौद्ध तथा वैष्णव धर्म प्रमुख हैं. जैन धर्म के संस्थापक महावीर एवं बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध, दोनों क्षत्रिय वंश के थे, और दोनों ने ब्राह्मणों की मान्यता को चुनौती दी।
जैन धर्म
  • जैन परंपरानुसार कुल 24 तीर्थंकर हुए। प्रथम तीर्थंकर ‘ऋषभदेव’ थे इन्हें जैन धर्म का संस्थापक माना जाता है।
  • 23वें तीर्थंकर ‘पाश्र्वनाथ’ थे। पाश्र्वनाथ, वाराणसी के थे।
  • महावीर स्वामी, 24वें तीर्थंकर थे।
  • महावीर स्वामी जैन धर्म के वास्तविक संस्थापक माने जाते हैं।
महावीर
  • 540 ईसा-पूर्व में कुण्डग्राम (वैशाली) में जन्म।
  • पिता – सिद्धार्थ, ज्ञातृक कुल के प्रधान।
  • माता – त्रिशला (लिच्छवी नरेश चेतक की बहन)
  • पुत्री – अनोज्ज प्रियदर्शनी
  • बचपन का नाम – वर्द्धमान
  • 42वें साल में ऋजुपालिका नदी के किनारे जिम्बुक ग्राम में शाल वृक्ष के नीचे ‘कैवल्य’ प्राप्ति।
  • इन्द्रियों को जीतने के कारण ‘जिन’ कहलाए। पराक्रम दिखलाने के लिए ‘महावीर’ कहलाए। महावीर ‘निर्ग्रन्थ’ भी कहे गए।
  • निर्वाण 468 ईसा-पूर्व में राजगीर के समीप पावापुरी में हुआ। (72 वर्ष की आयु में)
  • जैन धर्म में पाँच व्रत हैं:
  1. अहिंसा 2. अमृषा 3. अचैर्य                4. अपरिग्रह          5. ब्रह्मचर्य।
  • महावीर ने इनमें ‘ब्रह्मचर्य’ को जोड़ा। प्रथम चार पहले से चले आ रहे थे।
  • ‘अहिंसा’ पर अत्यधिक बल दिया गया।
  • महावीर ने वस्त्र त्याग करने की बात कही।
  • जैन धर्म में देवताओं का अस्तित्व स्वीकार किया गया है, पर उनका स्थान ‘जिन’ से नीचे रखा गया है।
  • जैन पुनर्जन्म में विश्वास करते थे।
  • ‘‘अणुव्रत’’ तथा ‘‘महाव्रत’’ की संकल्पना का सम्बन्ध जैन धर्म से है।
  • महावीर ने चाण्डालों में भी मानवीय गुणों की उपस्थिति की बात कही।
  • जैन धर्म के ‘त्रिरत्न’ या ‘तीन जौहर’ थेः
  1. सम्यक् ज्ञान
  2. सम्यक् ध्यान
  3. सम्यक् आचरण।
  • जैन धर्म में ‘युद्ध’ एवं ‘कृषि’ दोनों वर्जित हैं क्योंकि दोनों में जीवों की हिंसा होती थी।
  • ‘स्यादवाद’ अथवा ‘अनेकान्तवाद’ अथवा ‘सप्तमंगीनय’ का सम्बन्ध जैन धर्म से था।
  • महावीर ने अपने जीवनकाल में ही एक ‘संघ’ की स्थापना की थी।
  • जैन धर्म ‘कर्मवाद’ में विश्वास करता है।
  • जैन धर्म बाद में ‘श्वेताम्बर’ एवं ‘दिगम्बर’ में विभक्त हो गया।
  • ‘कर्नाटक’ में जैन धर्म का प्रचार ‘सम्राट् चन्द्रगुप्त मौर्य’ ने किया। इन्होंने जैन धर्म को स्वीकृत किया था।
  • महावीर के निर्वाण के 200 वर्ष बाद मगध में भारी अकाल पड़ा। अकाल बारह वर्षों तक रहा।
  • बहुत से जैन ‘बाहुभद्र’ के नेतृत्व में प्राण रक्षा हेतु दक्षिणापथ चले गए। शेष जैन लोग ‘स्थलबाहु’ के नेतृत्व में मगध में ही रह गए।
  • दक्षिणी जैन, ‘दिगम्बर’ कहलाए।
  • मगध के जैन ‘श्वेताम्बर’ कहलाए।
  • ‘बसदि’; जैन मठों को कहा जाता था।
  • कलिंग या उड़ीसा में जैन धर्म का प्रचार ईसा-पूर्व चैथी सदी में हुआ।
  • ‘खारवेल’ ने जैन धर्म को व्यापक संरक्षण दिया।
  • जैन धर्म ने ही सबसे पहले वर्ण-व्यवस्था और वैदिक कर्मकाण्ड की बुराइयों को रोकने का गंभीर प्रयास किया।
  • जैनों ने आम लोगों की भाषा ‘प्राकृत’ को अपनाया।
  • उनके धार्मिक ग्रन्थ अर्धमागधी भाषा में लिखे गए।
  • अंतिम रूप से इनका संकलन वल्लभी (गुजरात) में किया गया।
  • जैनों ने अपभ्रंश भाषा में पहली बार कई महत्त्वपूर्ण ग्रंथ लिखे और पहला व्याकरण ग्रंथ तैयार किया।
  • जैनियों ने कन्नड़ भाषा के विकास में भी योगदान दिया।
  • जैनियों ने भी बाद में मूर्ति-पूजा प्रारंभ की।
  • ‘दिलवाड़ा’ तथा ‘खजुराहो’ में कई प्रसिद्ध जैन मंदिर अवस्थित हैं।
  • प्रथम जैन सभा, चन्द्रगुप्त मौर्य के समय ‘पाटलिपुत्रा’ में संपन्न हुई। अध्यक्षता ‘स्थूलभद्र’ ने की थी। इसी में जैन धर्म ‘दिगम्बर’ एवं ‘श्वेताम्बर’ में बंट गया।
  • द्वितीय जैन सभा गुजरात के ‘वल्लभी’ में हुई थी। इसमें धर्मग्रंथों का अंतिम रूप से संकलन व लिपिबद्ध किया गया।

बौद्ध धर्म
महात्मा बुद्ध का जीवन वृत्त
  • जन्म – 563 ई. पू.
  • जन्मस्थान – कपिलवस्तु से 14 मील दूर लुम्बिनीवन में
  • पिता का नाम – शुद्दोधन (शाक्यों के राज्य कपिल वस्तु के शासक)
  • माता का नाम – महामाया (देवदह की राजकुमारी) कोसल राजवंश
  • बुद्ध के बचपन का नाम – सिद्धार्थ
  • बुद्ध की पत्नी का नाम- यशोधरा
  • बुद्ध के पुत्रा का नाम- राहुल
  • बुद्ध की मृत्यु- 486 ई. पू. (80 वर्ष की उम्र में)
  • मृत्यु स्थान- कुशीनगर (पूर्वी उत्तर प्रदेश)
  • गौतम बुद्ध या सिद्धार्थ का कुल ‘शाक्य’ था।
  • बुद्ध 29 वर्ष की आयु में घर से निकल पड़े थे। इसे ‘महाभिनिष्क्रमण’ कहा जाता है।
  • सात वर्षों तक भटकने के उपरांत 35 वर्ष की उम्र में बोध गया मे पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ। तबसे वे ‘बुद्ध’ अर्थात् ‘प्रज्ञावन’ कहलाने लगे।
  • गौतम बुद्ध ने अपने ज्ञान का प्रथम प्रवचन वाराणसी के ‘सारनाथ’ नामक स्थान पर दिया।
बौद्ध ग्रन्थ
  • बौद्ध साहित्य के मूल ग्रंथ त्रिपिटक कहे जाते हैं। जो संख्या में तीन हैं वे इस प्रकार हैं:
  1. विनयपिटक, 2. सुत्तपिटक एवं 3. अभिधम्म पिटक
  • विनयपिटक- इसमें बौद्ध भिक्षु-भिक्षुणियों के संघ तथा उनके दैनिक जीवन संबंधी नियमों का वर्णन किया गया है।
  • सुत्तपिटक- इसमें बौद्ध धर्म के सिद्धान्तों का वर्णन किया गया है।
  • अभिधम्मपिटक-इसमें बौद्ध धर्म की दार्शनिक विवेचना की गयी है।
  • बुद्ध ने चार आर्य सत्य बतलाए।
  1. दुःख,
  2. दुःख समुदय,
  3. दुःख निरोध,
  4. दुःख निरोध गामिनी प्रतिपदा अर्थात् आष्टांगिक मार्ग।
  • गौतम बुद्ध ने दुःख की निवृत्ति के लिए ‘आष्टांगिक मार्ग’ बताया। ये हैं – सम्यक् दृष्टि, सम्यक् संकल्प, सम्यक् वाक्, सम्यक् कर्मान्त, सम्यक् आजीव, सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति, सम्यक् समाधि।
  • बुद्ध मध्यम मार्ग के प्रशंसक थे।
  • उन्होंने अपने अनुयायियों के लिए आचार-नियम निर्धारित किए।
  • इस आचार-संहिता के मुख्य नियम हैं: पराये धन का लोभ न करना, 2. हिंसा न करना, 3. नशा का सेवन न करना, 4. दुराचार से दूर रहना।
  • बौद्ध धर्म ‘ईश्वर’ एवं ‘आत्मा’ को नहीं मानता।
  • बौद्ध संघ में स्त्रिायों को भी प्रवेश प्राप्त था।
  • आम लोगों की भाषा ‘पालि’ को बौद्ध धर्म ने अपनाया।
  • बौद्ध धर्म के तीन प्रमुख अंग थे: ‘बुद्ध’, ‘धम्म’ एवं ‘संघ’ (त्रिरत्न)।
  • बुद्ध का पालन-पोषण उनकी मौसी ‘प्रजापति गौतमी’ ने की थी।
बौद्ध संगीतियाँ
  • प्रथम बौद्ध संगीतिः
आयोजन स्थल: राजगृह
शासक: अजातशत्रु
अध्यक्ष: महाकश्यप
विशेषता: ‘सुत्तपिटक’ एवं ‘विनयपिटक’ का संकलन
  • द्वितीय बौद्ध संगीतिः
आयोजन स्थल: वैशाली
शासक: कालाशोक (महाकच्चायन)
अध्यक्ष: साबकमीर
विशेषता: बौद्धधर्म का ‘स्थविरवाद’ एवं ‘महासंघिक’ में विभाजन
  • तृतीय बौद्ध संगीतिः
आयोजन स्थल: पाटलिपुत्र
शासक: अशोक
अध्यक्ष: मोगलिपुत्त तिस्स
विशेषता: ‘अभिधम्मपिटक’ का संपादन
  • चतुर्थ बौद्ध संगीतिः
आयोजन स्थल: कश्मीर/जालंधर
शासक: कनिष्क
अध्यक्ष: वसुमित्र
विशेषता: बौद्ध धर्म का हीनयान एवं महायान में विभाजन.
  • बुद्ध द्वारा प्रतिपादित आष्टांगिक मार्ग की अवधारणा ‘धर्मचक्र प्रवर्तन सुत्त’ से सम्बन्धित मानी गई है।
  • महायान के साहित्य ‘संस्कृत’ भाषा में रचित हैं। एकमात्र अपवाद ‘मिलिन्द्पन्हों’ है, यह पालि में रचित है। इसमें ‘मिनांडर’ एवं भिक्षु ‘नागसेन’ की वार्ता संकलित है।
  • महायान के विकास का श्रेय ‘नागार्जुन’ को जाता है, जो ‘कनिष्क’ के समकालीन था। इसी के समय महायान संप्रदाय व्यापक रूप से फैला।
  • बौद्ध संघ में प्रवेश को ‘‘उपसंपदा’’ कहा जाता था।
  • बुद्ध के निर्वाण केा ‘महापरिनिर्वाण’ कहा जाता है।
  • भारत में पूजित पहली मानव प्रतिमाएँ संभवतः ‘बुद्ध’ की हैं।
  • बुद्ध का प्रथम उपदेश ‘धर्मचक्रप्रवर्तन’ कहलाता है। यह सारनाथ में दिया गया था।
  • बुद्ध ने अपना सर्वाधिक उपदेश ‘श्रावस्ती’ में दिया।

एक टिप्पणी भेजें

 
Top