लखनऊ। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अभिनव प्रयोगों के जरिये विकसित किये गए बिजनेस मॉडल को उद्यमिता का जामा पहनाने में अखिलेश सरकार उद्यमियों की मदद करेगी।

पहली पीढ़ी के उद्यमों (स्टार्ट अप) को इन्क्यूबेटर्स के जरिये व्यावसायिक सफलता के लिए सभी सुविधाएं एक छत के नीचे मुहैया कराने के मकसद से कैबिनेट ने आज उत्तर प्रदेश स्टार्ट-अप नीति 2016 पर मुहर लगा दी है।

नीति के तहत इन्क्यूबेटर्स और स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए 100 करोड़ रुपये के प्रारंभिक कॉर्पस फंड की स्थापना की गई है। स्टार्ट अप को कार्यालय के लिए स्थान व प्रशासनिक सेवाएं, हाई स्पीड इंटरनेट सुविधा, नेटवर्किंग गतिविधियां, मार्केटिंग में सहायता और उच्च शिक्षण संस्थानों से जुडऩे की सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार इन्क्यूबेटर की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता देगी।

इन्क्यूबेटर की स्थापना या क्षमता विस्तार के लिए सरकारी और अर्धसरकारी तकनीकी, प्रबंधन व शोध संस्थाओं को आइटी इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना के लिए 50 फीसद पूंजी अनुदान दिया जाएगा जिसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये होगी।

विशिष्ट मामलों में जरूरत के मुताबिक अधिक धनराशि देने की व्यवस्था की गई है। चुने गए इन्क्यूबेटर को अपनी गतिविधियों पर आने वाले खर्च से होने वाले नुकसान से निपटने के लिए पांच वर्ष तक सालाना पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाएगी। उन्हें शैक्षणिक और औद्योगिक क्षेत्र से मार्गदर्शन के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी।

एंजिल इन्वेस्टर्स/वेंचर फंड के 25 फीसद तक सहायता
उत्तर प्रदेश में स्टार्ट अप को प्रोत्साहन देने के लिए उन्हें एंजिल इन्वेस्टर्स/वेंचर फंड से मिलने वाली धनराशि के 25 प्रतिशत तक सहायता दी जाएगी। यह सहायता लोन के रूप में हो सकती है और अंशपूंजी भी। स्टार्ट अप को उनके प्रारंभिक/प्रोटोटाइप के स्तर पर एक साल के लिए 15000 रुपये भरण-पोषण भत्ता दिया जाएगा। पाइलट स्तर पर मार्केटिंग व व्यावसायिक गतिविधियों के लिए उन्हें 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी।

आई-स्पर्श को मंजूरी

मेरा देश-मेरा गांव, मेरा ये चमन...! यूं तो यह गीत की एक लाइन है मगर 'आई स्पर्श ' योजना में जिन गांवों का चयन होगा, वहां के नागरिकएक साल के अंदर इस जमीन पर उतरता महसूस करेंगे।

दरअसल, 300 करोड़ की इस योजना में ग्राम पंचायतों में ग्राम्य वन, पयर्टन क्षेत्र के विकास के साथ सूचना प्रौद्योगिकी, छात्रों को सोलर लाइट उपलब्ध कराने के साथ गांव की मूलभूत जरूरतें पूरा करने का लक्ष्य है। कैबिनेट बैठक में इस योजना को मंजूरी प्रदान कर दी गयी। एक अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 तक चलने वाली इस योजना के पहले चरण में जनेश्वर गांवों में से आई स्पर्श गांवों का चयन होगा।

योजना के ढेरों लक्ष्य में एक मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) में बढ़ोत्तरी करना भी है। आई-स्पर्श योजना में चयनित गांव के बाशिंदों की आय में वृद्धि के लिए कौशल विकास अभियान चलेगा।
सूचना प्रौद्योगिकी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करने पर जोर होगा। सामाजिक मेल-मिलाप, सामाजिक न्याय के साथ खेती-किसानी में आधुनिक एवं दक्ष तकनीकों का उपयोग कराया जाएगा।

संसाधनों को पुन: उपयोग योग्य बनाने की क्षमता विकसित करने का प्रशिक्षण अभियान चलेगा। सुरक्षा, स्वच्छता व स्वस्थपरक जीवनशैली और बेहतर आवासों का निर्माण किया जाएगा।

विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए सोलर लाइट

आई स्पर्श योजना में विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए सोलर लाइट व दिव्यांगों को कृत्रिम अंग व उपकरण उपलब्ध कराया जाएगा। गांवों में सोलर चालित आरओ वॉटर सिस्टम व वॉटर एटीएम लगाए जाएंगे। सार्वजनिक स्थल पर फलदार पौधे रोपे जाएंगे।

उपलब्ध भूमि में ग्र्राम्यवन विकसित होंगे। ग्रामीणों का जीवनस्तर सुधारने, रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ग्रामपरक योजनाएं चलायी जाएंगी। योजना से इतर अन्य महकमे भी इन गांवों को विकसित करने में जुटेंगे। अर्थात अगर गांव में ऐसे स्थल हैं, जिसका ऐतिहासिक, धार्मिक महत्व है तो उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

ग्रामपरक विशेष प्रकार के रोजगार हेतु (डिजाइन/तकनीक, प्रशिक्षण एवं विपणन) व्यवस्था करना भी है। गांवों में हैंडीक्राफ्ट, कृषि व्यापार की योजना भी लागू हो सकती है। योजना के नियमावली में कहा गया है कि आइ स्पर्श गांव में योजनाएं चलाने के लिए उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में ग्राम स्तरीय क्रियान्वयन समिति बनेगी।

निगरानी के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में अनुश्रवण समिति और राज्य स्तर पर निगरानी के लिए मुख्य सचिव में राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति गठित की जाएगी।

आई स्पर्श गांव का अर्थ

आइ-इनक्ल्यूसिव ग्रोथ (समग्र विकास)
एस-स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास)
पी-पार्टिसिपेशन (सहभागिता)
ए-एडाप्टेशन (अनुकूल)
आर-रिसपांसिव गवर्नेंस (उत्तरदायी शासन)
एस-सेफ्टी एंड सिक्योरिटी (सुरक्षा-संरक्षा)
एच-हेल्थ (स्वास्थ्य)

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