प्रश्न पत्र निर्माण की योजना बनाना प्रथम सोपान के अंतर्गत आता है इसके अंतर्गत परीक्षा से सम्बंधित अनेक निर्णय लिए जाते हैं , इसके निर्माण हेतु विषय वस्तु ,शिक्षण उद्देश्यों ,प्रश्नो के प्रकार , प्रश्नों की संख्या ,प्रसाशन का समय, अंकन विधि , परिक्षण प्रारूप जैसी बातों का निर्धारण किया जाता है ।परीक्षण की विषय वस्तु ,शिक्षण उद्देश्य तथा प्रश्नो की संख्या को निश्चित करने के बाद विशिष्टीकरण तालिका तैयार की जाती है ..जो निम्नवत है ...
1. True false type
2. matching type
3.recall type
4.completion type
5.multiple choice type
6.short answer type
7.essay type
अंकन विधि का निर्धारण भी इस योजना का आवश्यक अंग है वस्तुनिष्ठ प्रश्नो में सही उत्तर को 1 अंक गलत को शून्य दिया जाना !! प्रश्नो की रचना करना ....प्रश्न पत्र निर्माण प्रक्रिया के दूसरे सोपान के अंतर्गत प्रश्नो की रचना करना आता है !जितने प्रश्न रखने हैं प्रश्न पत्र में उससे दोगुने प्रश्नो को तैयार किया जाता है प्रश्नो की रचना करते समय पूर्ववर्ती परीक्षाओं में सम्मिलित प्रश्नो से संकेत प्राप्त किये जा सकते हैं , प्रश्नो के लिए निर्देश तैयार कर लिए जाते हैं इस बात का ध्यान रखा जाता है की प्रयुक्त भाषा एवम् संकेत छात्रों के स्तर के अनुरूप हों , प्रश्नो की रचना करते समय निम्न बातें ध्यान रखनी चाहिये ...

1. दो अर्थों वाले वाक्यों की सहायता से प्रश्न नहीं बनाने चाहिये अतः जिन वाक्यों के दो अर्थ प्रदर्शित हों ऐसे प्रश्न नहीं बनाने चाहिए जैसे ... दो अण्डे देने वाले पक्षियों का नाम लिखो ? ( गलत चयन है ) अण्डे देने वाले दो पक्षियों के नाम लिखो ?( सही चयन है ) उदहारण 1 में शिक्षक के बनाये प्रश्न से दो अर्थ निकलते हैं जिससे छात्र
भ्रमित हो सकते हैं कि दो अण्डे कौन से पक्षी देते हैं जबकि दूसरा उदहारण सही है प्रश्न में जो पूछा जा रहा है वही स्पष्ट हो रहा है !!

2. सही उत्तर के लिए किसी निश्चित उत्तर क्रम से बचना चाहिये कभी कभी सही उत्तर एक निश्चित क्रम में आने लगते हैं , यदि छात्र उस क्रम कोण समझ जाते हैं तो उस क्रम के आधार पर ही सही उत्तर दे देते हैं अतः सही उत्तर के लिए कोई क्रम न बने इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए !!

3. प्रश्नो की रचना करने के लिये पाठ्य पुस्तक के वाक्यों को यथावत नही होना चाहिये जहाँ तक संभव हो सके अपने शब्दों में प्रश्नों की रचना करें !!

4. प्रत्येक प्रश्न किसी विशिष्ट उद्देश्य की तरफ केंद्रित होना चाहिए !!

5.प्रश्नो को परस्पर सम्बंधित नही होना चाहिये , प्रश्नो की रचना में कठिनाई स्तर तथा वैधता का भी ध्यान रखना चाहिये , प्रश्न जरुरत से ज्यादा कठिन भी न हो सभी !!

6.परिक्षण का प्रारूप इस प्रकार का होना चाहिये कि छात्र यह समझ सकें कि उन्हें क्या करना चाहिये तथा परीक्षक उनके उत्तर का मूल्याङ्कन किस रूप में करेगा !!

प्रश्नो का चयन करना ..इस सोपान को try out stage या जांच स्तर भी
कहते हैं ये निम्न दो प्रकार के होते हैं
1.प्रारंभिक जांच स्तर
2.वास्तविक जांच स्तर
प्रश्नो का कठिनाई स्तर निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात किया जा सकता है ...
D.V =(Rh +Rl )/2n
जहाँ D.V =difficulty value
Rh=right response of higher group
Rl=right response of lower group
n=no.of items

प्रश्न पत्र निर्माण के द्वितीय सोपान में सभी प्रश्न उपुक्त हों यह आवश्यक नही अतः उन प्रश्नो में से उपयुक्त प्रश्नो का चयन किया जाता है इसलिये इस सोपान को प्रश्नो का try out stage या जांच स्तर भी कहा जाता है !!
Pre try out stage में भाषा संबंधी त्रुटियों एवम् भ्रांतियों को दूर किया जाता है इसके लिए प्रश्न पत्र की कुछ प्रतियां तैयार कर उन्हें 10 या 15 छात्रों के छोटे समूह पर प्रसाशित किया जाता है छात्रों के द्वारा अनुभव की गई कठिनाइयों के आधार पर प्रश्नो का संसोधन किया जाता है या उन्हें हटा दिया जाता है !!

वास्तविक जांच स्तर post try out stage के अंतर्गत परिक्षण की तकनिकी विशेषताओं को ज्ञात किया जाता है इसमें कठिनाई स्तर या वैधता को ध्यान में रखते हैं देखते हैं की प्रश्न अच्छे तथा कमजोर छात्रों में अंतर
स्थापित कर  रहा है या नहीं !!

परीक्षा में अधिकांश प्रश्न औसत कठिनाई वाले अर्थात 40 प्रतिशत से 60 प्रतिशत कठिनाई स्तर वाले रखे जाते हैं अत्यधिक सरल एवम् अत्यधिक कठिन प्रश्नो को नहीं रखना चाहिये !!

प्रश्नो के प्रकार
लिखित प्रश्न ...1. निबंधात्मक 2.वस्तुनिष्ठ 3.अति लघु उत्तरीय
2.वस्तुनिस्ष्ठ .. वहु विकल्पीय ..मिलान ..सत्य असत्य ...


स्रोत साभार : फेसबुक कापी पेस्ट,

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  1. नील पत्र जाना जाता है
    द्वि दिशा सूचक चार्ट या
    त्रि सूचक चार्ट

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