नामांकन माह

नामांकन का लिए रजिस्टर
हम सबका धउराये रहे
अम्मा गोहूँ कटती हैं
औ लरिका नदी नहाये गए

घर के बाहर बोकरी-भैंसी
जइसे हँसी उड़ाए रहे
तुम गली मोहल्ला घूम रहे
हम तो चुप्पे पगुराय रहे

कूकुर नमक चुकाए रहे हैं
मिड-डे-मीली दावत का
भौंक-2 होशियार करैं
देख गदेलवा आवत बा

गुमटी वाला छप्पर ताने
आँख बगारे देखि रहा
भौंकत कूकूर ,जलत गुरू जी
ठंडा पानी लेहे खड़ा

नीम के नीचे खाट बिछाए
भूधर चाचा चटक रहे
मुंह म बीड़ी ,हाथ म क़ाग़ज़
कफ खखार कर गटक रहे

काँख-काँख तब बोल परे
अबकी पाथर परिगे हैं
जउन बचे हैं ,उइं उठी आवैं
आधे गोहूँ सड़ी गे हैं

लड़िका बच्चा ,अम्मा बाबू
ख्यातन डेरा डाले हैं
कुछ चारा म अभिरे हैं
जौ घर म गोरू पाले हैं

चार दिनन के बाद रजिस्टर
फिर लई घूमेव सबके घर
तबै गदेलवा नांव लिखइहें
मुंशी जी ! तुम जइहो तर

सुधांशु श्रीवास्तव

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