child
By haribhoomi.com | Mar 17, 2016 |

नई दिल्ली. जब बच्चे छोटे होते हैं तो अपनी मनमानी करते उन्हें देख माता-पिता को उनपर बड़ा लाड़ आता है। लेकिन वहीं जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो बात ना मानने पर अभिभावकों को गुस्सा आता है। लेकिन गुस्से से कुछ नहीं होता जनाब।
हम आपको बताते हैं बच्चों को ज़िद्दी होने और आपका निरादर करने से कैसे रोका जा सकता है..
1. अधिकतर, छोटी उम्र में हम अपने बच्चों की हर बात मानते हैं और उनकी हर नादानी को टाल देते हैं। ऐसा करने पर बच्चे शायद आपकी हर बात को नज़र-अंदाज़ करना शुरू कर दें। यदि आप ऐसा होने नहीं देना चाहते तो बचपन से ही अपने बच्चों को अच्छे-बुरे की पहचान करवाते हुए, उनको कुछ ग़लत करने का परिणाम भी समझाएँ।

2. हम कई बार बच्चे को बदतमीज़ी करते वक़्त, या तो डाँट देते हैं या कई बार हाथ भी उठा देते हैं। हो सकता है कि ऐसा होने पर आपका बच्चा आपसे डरने लगे और छुप कर ग़लत चीज़ों में पड़ जाए। इसलिए क्रोधित होने या मारने के बजाए, आप अपने बच्चे के दुर्व्यवहार पर उसको पहले प्यार से उस बुरी आदत को सुधारने को कहें।
3. ऐसा भी होता है कि बच्चा अंजाने में कोई ग़लत कार्य में पड़ जाता है. बिना सोचे-समझे, अपने बच्चे को बुरा या दोषी ठहराना भी ग़लत है। अपने बच्चों से हमेशा आपसी सलाह-मशवराह करने की छूट रखें ताकि आपका बच्चा आपसे खुल कर हर बात कर सके।

4. माता-पिता जब अपने बच्चे को किसी काम को करने से रोकते हैं या डाँट भी देते हैं तो घर के बढ़े बच्चों को अपने मोह में आकर बचा लेते हैं। ऐसा होने पर आप अपने बच्चे को अकेले में सही और ग़लत के बीच का अंतर समझाएँ। अपने बड़ों को भी अकेले में इस बात का एहसास दिलाएँ कि शायद उनके प्यार की आड़ में आगे चल कर बच्चा बिगड़ सकता है।

5. तैश में आकर या अंजाने में, कई बार हम बुरा व्यवहार प्रकट कर जाते हैं। ये ना भूलें कि बच्चे हमसे ही बहुत सी आदतें अपनाते हैं। इसलिए अपने बच्चे की अच्छी परवरिश करते समय, खुद की भी अच्छी छवि बनाकर रखें।
 
साभार : हरिभूमि
Read more at 
http://www.primaryshiksha.com/2016/04/stubborn-child-dealing-tips.html

एक टिप्पणी भेजें

 
Top