राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने नंबरों के मामले में जो दरियादिली दिखाई है, उस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। विशेष तौर पर हाईस्कूल और इंटर की मेरिट में पहले दो स्थानों पर एक ही कालेज की छात्रओं का होना लोग पचा नहीं पा रहे हैं। प्रधानाचार्यो का एक समूह इसे गंभीरता से उठाने की तैयारी में जुटा हुआ है। उनका मानना है कि कहीं न कहीं परीक्षा प्रक्रिया की खामियों का कालेजों द्वारा फायदा उठाया जा रहा है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद यानी यूपी बोर्ड परीक्षा 2016 का परिणाम प्रतिशत भले ही सभी को रास आ रहा है, लेकिन टॉपर सूची अधिकांश लोगों के गले नहीं उतर रही है। इसकी वजह कुछ ऐसे कालेजों की छात्रओं ने उसमें जगह बनाई है, जिनकी साख खुद उनके जिले में ही अच्छी नहीं है।

उनमें से एक कालेज ऐसा है, जहां यूपी बोर्ड परीक्षा शुरू होने से महज एक पखवारे पहले हुई शिक्षक पात्रता परीक्षा में नकल का बोलबाला होने की रिपोर्ट परीक्षा नियामक प्राधिकारी को सौंपी गई। यही नहीं रिपोर्ट में उस कालेज को परीक्षा केंद्र बनाने पर भी सवाल उठाया गया था। हालांकि बाद में जैसे-तैसे इस प्रकरण का पटाक्षेप कर दिया गया। अब वहां के परीक्षार्थी अव्वल आने पर फिर से सवाल उठना शुरू हो गए हैं।

शिक्षा विभाग के जानकार यह भी कहते हैं कि जब एक जैसे सवालों का जवाब लिखने पर परीक्षक उसे मॉस कॉपिंग के नजरिए से देखते हैं तब एक ही कालेज के परीक्षार्थी टॉपर सूची में जगह बनाने में कैसे कामयाब हो गए।

उनका यह भी कहना है कि ऐसा पहले भी होता रहा है, लेकिन तब उन कालेजों का ही श्रेष्ठता सूची में दबदबा रहता था, जिनकी साख उनकी मेरिट से उम्दा होती थी। ऐसा ही हाल श्रेष्ठता सूची में आने वाले जिलों का भी है। वर्ष 2014 में हाईस्कूल के परिणाम में आजमगढ़ शीर्ष पर था, 2016 में भी वह शीर्ष पर बना रहा।

वहीं, महराजगंज, संतकबीर नगर, बलिया, मऊ जैसे जिले शीर्ष दस में हर बार घूम-फिरकर आ रहे हैं। ऐसे ही इंटर में बस्ती, गोंडा, फैजाबाद, सुलतानपुर और संतकबीर नगर भी लगातार टॉप टेन में शुमार हैं, जबकि इन्हीं जिलों से नकल होने की शिकायतें बहुतायत में आती हैं।
सूची पर संदेह ठीक नहीं

माध्यमिक शिक्षा परिषद की सचिव शैल यादव कहतीं हैं कि पहले यूपी बोर्ड हाईस्कूल व इंटर के टॉपर की सूची अधिकृत रूप से जारी करता था, लेकिन इधर मीडिया को सहयोग देने के लिए ऐसा किया जा रहा है। इसमें संदेह करना ठीक नहीं है। सब कुछ पारदर्शी ढंग से हुआ है। जिसे विश्वास न हो वह नियमानुसार कॉपियां देख सकता है।

एक टिप्पणी भेजें

 
Top