लखनऊ : उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने टीजीटी (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) और पीजीटी (प्रवक्ता) परीक्षा में कथित धांधली की जांच करने का आदेश माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड को दिया है।

न्यायालय ने यह आदेश आजमगढ़ के समाजसेवी संजय कुमार की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया है।

याचिका में कहा गया है कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने टीजीटी-पीजीटी परीक्षा की कॉपियां जांचने का करार एक प्राइवेट कंपनी से किया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि उस कंपनी द्वारा कॉपियां जांचने में धांधली करने के तथ्य सामने आये हैं।

याची के अधिवक्ता अशोक पांडेय ने बताया कि जिन अभ्यर्थियों की सेटिंग हो जाती है, उनकी उत्तर पुस्तिकाएं सादी जमा कर ली जाती हैं जिसमें बाद में सही उत्तर भरे जाते हैं। अधिवक्ता के अनुसार उत्तर पुस्तिकाओं के तीन सेट होते हैं जिनमें से एक अभ्यर्थी को दिया जाता है जबकि एक-एक बोर्ड और कंपनी के पास चला जाता है।

उन्होंने दावा किया कि ऐसी कई उत्तर पुस्तिकाएं मिली हैं जिनकी कंपनी की प्रति में सही जवाब भरे गए हैं जबकि बोर्ड के पास जो प्रति है, वह सादी है। याचिका में पूरे प्रकरण की जांच कराने की मांग की गई है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एपी शाही और न्यायमूर्ति एआर मसूदी की खंडपीठ ने माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को याचिका में लगाये गए आरोपों की जांच करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने तीन सप्ताह में जांच पूरी कर हलफनामे के साथ जांच रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

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