इलाहाबाद

यूपी बोर्ड से संबद्ध प्रदेशभर के 24 हजार से अधिक राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन स्कूलों का शैक्षणिक सत्र जुलाई से ही फिर शुरू करने की तैयारी है।

विधानसभा चुनाव के कारण तकरीबन एक महीने देरी से शुरू हो रही हाईस्कूल-इंटरमीडिएट की परीक्षाएं और विभिन्न शैक्षणिक संगठनों व अभिभावकों से मिले सुझाव के आधार पर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षणिक सत्र एक जुलाई से शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है।

दो साल पहले तक यूपी बोर्ड का सत्र जुलाई से शुरू होता था। लेकिन पूर्व माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली ने सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड का सत्र बदलकर 2015-16 से एक अप्रैल से कर दिया। इस साल विधानसभा चुनाव के कारण परीक्षाएं फरवरी के तीसरे सप्ताह की बजाय 16 मार्च से शुरू होकर 21 अप्रैल तक प्रस्तावित हैं।

10वीं-12वीं की कॉपियों का मूल्यांकन मई के दूसरे सप्ताह के होगा। ऐसे में परीक्षा के बीच एक अप्रैल से नया सत्र शुरू करना नामुमकिन होगा। व्यवहारिक समस्याओं को देखते हुए बोर्ड ने 2017-18 शैक्षणिक सत्र जुलाई से शुरू करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। मंजूरी मिलने के बाद यूपी बोर्ड एक्ट 1921 में संशोधन किया जाएगा।

गांव से रूबरू होंगे बच्चे, सीखने का मिलेगा मौका
सत्र बदलने का लाभ बच्चों को मिलेगा। गर्मी की छुट्टियों में पहले बच्चे दादी-नानी के गांव जाकर पेड़-पौधे, खेती-किसानी से लेकर बहुत सी चीजें सीखते थे।

अप्रैल से सत्र होने के कारण होमवर्क के दबाव में बच्चे उतने स्वच्छंद मन से छुट्टियां नहीं मना पाते या फिर उतने दिन गांव में नहीं रह पाते जितना पहले समय देते थे। एक बार फिर सत्र बदलने से बच्चों को मौका मिलेगा।

शिक्षा विभाग में अफसर रहीं भावना शिक्षार्थी कहती हैं कि सत्र बदलने से बच्चों को सीखने का मौका मिलेगा इसमें कोई दो राय नहीं। हालांकि जो शिक्षक 31 मार्च को रिटायर होने वाले थे वे अब 30 जून तक रहेंगे जिससे सरकार पर आर्थिक बोझ पड़ेगा।

क्या कहते हैं अफसर
यूपी बोर्ड का सत्र जुलाई से फिर शुरू करने संबंधी प्रस्ताव शासन को भेजा है। मंजूरी के बाद अधिनियम में आवश्यक संशोधन के साथ नई व्यवस्था 2017-18 सत्र से ही लागू कर दी जाएगी। शिक्षक संगठनों, अभिभावकों ने भी सत्र अप्रैल की बजाय जुलाई से करने का सुझाव दिया था।
शैल यादव, सचिव यूपी बोर्ड

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