लखनऊ।
आगामी 16 मार्च से शुरू हो रही यूपी बोर्ड परीक्षा-2017 शहर में फर्जी शिक्षकों के जिम्मे रहेगी। ये फर्जी शिक्षक परीक्षा केन्द्रों पर ड्यूटी करते नजर आएंगे।

यूपी बोर्ड से संबद्ध शहर के निजी स्कूलों में योग्य शिक्षक की भारी कमी और उस पर शिक्षा विभाग द्वारा निजी स्कूलों के शिक्षकों को बढ़ी संख्या में ड्यूटी पर लगाने की तैयार के चलते यह स्थिति सामने आई है।

यूपी बोर्ड के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट में पढ़ाने वाले शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता निर्धारित है। हाल में शिक्षा विभाग की जांच में निजी स्कूलों के 75% शिक्षकों के फर्जी होने का खुलासा हुआ है। यह सभी निर्धारित योग्यता को पूरा नहीं करते हैं।

5000 करते हैं परीक्षा ड्यूटी

जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के स्तर पर आगामी परीक्षा की तैयारी चल रही हैं। इन परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी में करीब 5 हजार शिक्षकों को लगाया जाता है।

इनमें, 2500 शिक्षक तो एडेड और सरकारी स्कूल से होते हैं। लेकिन बाकी, 2500 में एक निजी स्कूलों के भागीदारी ज्यादा है। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय द्वारा स्कूलों में काम कर रहे फर्जी शिक्षकों को ही इस काम में लगाने की तैयारी की जा रही है।

इसके पीछे है शिक्षा माफिया

माध्यमिक शिक्षा संघ के प्रदेश मंत्री डॉ. आरपी मिश्र का कहना है कि इस पूरे खेल के पीछे शिक्षा माफिया है। यह फर्जी शिक्षक ज्यादातर उन स्कूलों के हैं जहां सिर्फ छात्र-छात्राओं को बोर्ड परीक्षाओं में बैठाने का धंधा हो रहा है। इन फर्जी शिक्षकों का इस्तेमाल नकल कराने के लिए होता है।

(बॉक्स)

अन्तिम दौर में होता है खेल

हर साल होने वाली बोर्ड परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी में खेल होता है। पिछली बार बोर्ड ने खुद इन कक्ष निरीक्षकों के पहचान पत्र जारी करने की बात सामने आई। लेकिन परीक्षा नजदीक आने पर आनन-फानन में जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय को यह जिम्मेदारी सौंपी गई । परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में फर्जी कक्ष निरीक्षक पकड़े गए थे। असल में, इन्हें कक्षाओं में नकल कराने के लिए लगाया जाता है।

कोट-

छात्रहित में पूरी सतर्कता बरती जा रही है। बड़ी संख्या में निजी स्कूलों के शिक्षकों का ब्योरा कार्यालय को मिल गया है। इनमें से अयोग्य शिक्षकों की पहचान भी कर ली गई है। जल्द ही इनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।

- उमेश त्रिपाठी, जिला विद्यालय निरीक्षक

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