आगरा।
नाराज डिग्री शिक्षक चुनाव ड्यूटी पर नहीं गए। वेतनमान और पद के मुताबिक ड्यूटी न मिलने पर करीब 100 से अधिक शिक्षकों ने ड्यूटी से मुंह मोड़ लिया। साथियों के खिलाफ एफआईआर भी नाराजगी की बड़ी वजह बनी। इनके खिलाफ एफआईआर भी कराई जा सकती है।

बता दें कि आयोग ने लगभग 200 डिग्री शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगाई थी। इनमें से करीब 35 शिक्षकों को सेक्टर मजिस्ट्रेट और स्टेटिक मजिस्ट्रेट बनाया गया था। शेष को पीठासीन अधिकारी के रूप में नियुक्त किया था।

इससे शिक्षक नाराज हो गए। उनका कहना था कि शिक्षकों को ग्रेड और पद के हिसाब से मजिस्ट्रेट बनाया जाना चाहिए था। शिक्षकों ने आयोग के अलावा कमिश्नर से भी इसकी शिकायत की थी। आश्वासन के बाद भी शिक्षकों को राहत नहीं मिली।

इसके बाद शिक्षक हाईकोर्ट की शरण में चले गए। अदालत ने डीएम को चुनाव आयोग की नियमावली के मुताबिक शिक्षकों को ड्यूटियां आवंटित करने के निर्देश दिए थे।

इसके अनुपालन में करीब 55 शिक्षकों को मजिस्ट्रेट और उड़नदस्तों में उच्चीकृत कर दिया गया। लगभग 120 शिक्षक प्रशिक्षण में नहीं गए। इनमें से करीब 65 शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर करा दी गई।

शिक्षक नेताओं ने साथियों की निजी मुचलके पर जमानत करा ली थी। जमानत के बाद इनमें से कोई ड्यूटी पर नहीं गया है। सभी घर बैठे हैं। दूसरी ओर साथियों के खिलाफ मुकदमे से खफा दूसरे शिक्षकों ने भी ड्यूटी छोड़ दी है।

वर्जन

प्रशासन ने शिक्षकों को बेवजह प्रताड़ित किया है। ड्यूटी से किसी को एतराज नहीं है। शिक्षकों ने चुनाव में हमेशा सहयोग किया है। आगे जो होगा देखा जाएगा। -डा. एके सिंह, महामंत्री अंबेडकर विवि शिक्षक संघ (औटा)।

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