जौनपुर।
जौनपुर में बेसिक शिक्षा विभाग में तीन साल पहले हुई शिक्षक भर्ती में नियुक्त हुए शिक्षकों के दस्तावेजों की बहुत जल्द जांच शुरू होने वाली है। इन नियुक्तियों की जांच होने के बाद शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने 380 शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच होगी।

वर्ष 2012 से अब तक गैर जिलों चार महीने पहले हुई 29 हजार शिक्षक भर्ती में 37 शिक्षकों के टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें कुछ शिक्षकों की डिग्रियां भी जांच के दायरे में आ गईं हैं।

इसमें ऐसे शिक्षक हैं जिन्होंने सम्पूर्णानन्द संस्कृ त विश्वविद्यालय वाराणसी से पूर्व मध्यमा (हाईस्कूल), उत्तर मध्यमा (इंटरमीडिएट) और शास्त्री (स्नातक) की डिग्री हासिल करने का प्रमाण पत्र लगाया है।

दरअसल टीईटी के फर्जीवाड़े का यह बड़ा खुलासा पश्चिमी यूपी के जिलों से हुआ है। उक्त जिलों में अब तक करीब 48 फर्जी शिक्षकों को नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका है। ये ऐसे फर्जी शिक्षक थे जिन्होंने टीईटी का फर्जी अंकपत्र लगाकर नौकरी प्राप्त करते हुए वेतन भी हासिल कर लिया था।

इन भर्तियों में फर्जी शिक्षक निकलने के बाद अब विभाग ने अगस्त 2013 में शिक्षक भर्ती में नियुक्त हुए 380 शिक्षकों की भी जांच कराने का फैसला लिया है। इसके साथ ही फरवरी 2013. 14 में नियुक्त 39 उर्दू शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्र जांच के दायरे में आ गए हैं।

इस संबंध में विभागीय सूत्रों ने बताया कि गैर जिलों से अन्तरजनपदीय तबादले के बाद जिले में आए 884 शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्र भी सत्यापित होंगे। इसके अलावा शिक्षामित्र से शिक्षक बनने वाले 3273 सहायक अध्यापकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की भी जांच कराई जाएगी।

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