लखनऊ। निज संवाददाता बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के छात्रों ने बीएड परीक्षा परिणाम का पुनर्मूल्यांकन कराए जाने का विरोध किया है। उन्होंने इस सम्बन्ध में प्राक्टर प्रो. राम चन्द्रा को ज्ञापन देकर मांग की है कि इस आदेश को शीध्र निरस्त किया जाए।

बीएड परीक्षा परिणाम पर दलित छात्रों ने आपत्ति उठाई थी। उनका कहना था कि अंक देने में अनियमितता बरती गई है। इसको लेकर दलित छात्रों ने आंदोलन भी छेड़ दिया था।

इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने बीएड परीक्षा का पुर्नमूल्यांकन कराए जाने का आदेश जारी कर दिया। बीएड विभाग में नोटिस बोर्ड पर सूचना लगने के बाद गैर आरक्षित वर्ग के छात्र-छात्राएं इसेक विरोध में आ गए।

उनका कहना है कि विश्वविद्यालय के इस कदम से छात्रों का भविष्य अंधकारमय होगा। काफी छात्र टीईटी की परीक्षा में बैठने वाले हैं। जल्द ही परीक्षा होनी है। उनका यह भी कहना है कि बीएड तृतीय वर्ष में मौखिक परीक्षा होती है और टीचिंग प्रैक्टिस के नम्बर दिए जाते हैं।

ऐसे में मौखिक परीक्षा का पुनर्मूल्यांकन का मतलब है कि फिर से परीक्षा होना। यह गलत है। उन्होंने कहा कि जिन छात्रों के नम्बर कम है, उनका पुनर्मूल्यांकन कराया जाए। सबका करना सही नहीं है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की विवि इकाई के अध्यक्ष अभिषेक मिश्रा ने कहा कि परिषद किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देगा। इसका विरोध करेगा। उन्होंने मांग की कि विवि ऐसा रास्ता निकाले कि जिससे सामान्य व आरक्षित सभी छात्रों के साथ न्याय हो सकें।

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