जासं, इलाहाबाद : निजी स्कूलों में फीस और स्टेशनरी को लेकर पर भले ही प्रशासन ने सख्ती दिखाने का प्रयास किया हो, लेकिन स्कूलों के प्रबंधन ने इस फरमान को बेहद हल्के में लिया।

आठ दिन बाद शहर के केवल 10 स्कूलों ने जिला विद्यालय निरीक्षक को रिपोर्ट सौंपी, वह भी आधी अधूरी। अब मंगलवार को रिपोर्ट मिलने पर प्रशासन की प्रतिक्रिया देखने योग्य होगी।

निजी स्कूलों में फीस, विकास शुल्क, यूनिफार्म, किताबों आदि को लेकर जो चल रही है उसके विरोध में चल रहे आंदोलनों को देखते हुए जिलाधिकारी संजय कुमार ने एडीएम वित्त दयाशंकर पांडेय की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की थी।

नौ अप्रैल को जांच कमेटी ने स्कूल प्रबंधन व अभिभावक संगठनों के साथ बैठक कर स्कूलों से विस्तृत ब्योरा मांगा था। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक ने सभी विद्यालयों को बाकायदा प्वाइंट बनाकर पत्र भेजा था।

मगर स्कूलों ने इस सरकारी फरमान को बेहद हल्के में लिया। जिला विद्यालय निरीक्षक कोमल यादव ने बताया कि सेंट जोसेफ स्कूल एंड कालेज, वाईएमसीए सेनेट्री स्कूल एंड कालेज, सेंट मैरिज कांवेन्ट, आइपीईएम, सेंट जांस को एड, डीपी पब्लिक स्कूल, डीपीएस नैनी, गोल्डेन जुबिली, देव प्रयाग पब्लिक स्कूल, न्यू आरएसजे झूंसी ने ही ब्योरा दिया है। इसमें फीस का विवरण केवल सेंट जोसेफ ने दिया है। बाकी सभी विद्यालयों ने आधी अधूरी जानकारी दी है, जिसे मंगलवार को जांच कमेटी के अध्यक्ष के सामने पेश किया जाएगा।

🎯सालों से चल रही :
अंग्रेजी माध्यम के निजी विद्यालयों की सालों से चल रही है। स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई के लिए 2007 और 2009 में शासनादेश जारी हुआ है लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नही हुई। यही कारण है कि स्कूल प्रशासन लगातार कर रहा है।

एक टिप्पणी भेजें

 
Top