इलाहाबाद वरिष्ठ संवाददाता यूपी के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के तकरीबन 1.60 लाख पद खाली हैं। प्रदेश सरकार की ओर से केन्द्र को भेजी गई सूचना के मुताबिक, कक्षा आठ तक के सरकारी स्कूलों में अप्रैल 2016 तक 174726 पद रिक्त थे।

सके बाद 15 हजार सहायक अध्यापकों की भर्ती की गई। इस प्रकार वर्तमान में तकरीबन 1.60 लाख पद खाली हैं।

प्रदेश सरकार की ओर से सर्व शिक्षा अभियान के तहत वित्तीय सहायता के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सूचना भेजी गई थी। गोंडा के आरटीआई एक्टिविस्ट दुर्गेश प्रताप सिंह को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली जानकारी के मुताबिक, प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों के 759958 स्वीकृत पदों में से 585232 कार्यरत थे।

22 अप्रैल 2016 को हुई सर्व शिक्षा अभियान के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में इन आंकड़ों को प्रस्तुत किया गया था। इसी के आधार पर शिक्षकों के वेतन समेत अन्य मदों में ग्रांट को मंजूरी मिली थी।

👉पीएबी की बैठक के आंकड़ों पर एक नजर :-
●प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 5,32,001 सृजित पदों के सापेक्ष 1,53,307 पद खाली
●प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के 66,498 पदों के सापेक्ष 1016 पद रिक्त
●उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 1,17,240 पदों के सापेक्ष 5,390 खाली
●उच्च प्राथमिक स्कूलों में प्रधानाध्यापक के 44,219 पदों के सापेक्ष 15,013 रिक्त
●22 अप्रैल 2016 तक कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों में शिक्षकों के कुल 1,74,726 पद खाली थे।
●इसके अलावा प्रदेश के 10,187 प्राथमिक विद्यालय व 4895 उच्च प्राथमिक विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे चल रहे थे।
इनका कहना है :-
आरटीआई में मिली सूचना ने बेसिक शिक्षा के गिरते स्तर और विभाग द्वारा छिपाए जा रहे शिक्षकों के खाली पदों की पोल खोल दी हैं। विभाग इतनी अधिक रिक्तियों के बावजूद भी सुप्रीमकोर्ट के निर्देशानुसार बीएड टीईटी पास युवाओं की नियुक्ति नहीं कर रहा है।
दुर्गेश प्रताप सिंह

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