नई दिल्ली| सातवें वेतन आयोग को लेकर सरकार द्वारा बनाई गई समिति की बैठक खत्म हो गई. माना जा रहा था कि सातवें वेतन आयोग के लागू होने के बाद कई मुद्दों को लेकर कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी जताई थी. कर्मचारियों की इसी नाराजगी को दूर करने के लिए सरकार द्वारा बनाई गई तीन समितियों में से एक सिर्फ अलाउंस को लेकर बनाई गई थी ।

बता दें इस समिति की अब तक 15 अहम बैठक हुई. इस बैठक में कर्चारियों के मुखिया और सरकारी अधिकारीयों के बीच हुई.अब यह बैठक खत्म हो गई. वहीं इस पुरे मामले पर एनसीजेसीएम के योजक शिव गोपाल मिश्र ने न्यूज़ चैनल एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि अब यह अंतिम दौर की बैठक थी. इसके बाद अब यह बैठक नही होगी. उन्होंने कहा कि अब समिति की रिपोर्ट दो से चार दिनों के भीतर कैबिनेट को सौंप दिया जाएगा ।

🎯क्या है विवाद :
सातवें वेतन आयोग ने जो सिफारिशें की हैं, उसमें कर्मचारियों को एचआरए, टीए-डीए के साथ-साथ कई और अलाउंस के मुद्दों पर आपत्ति है. दरअसल, इस वेतन आयोग ने ऐसे कई भत्तों को समाप्त कर दिया है जो बहुत साल पहले से चले आ रहे थे. 196 में से अब सिर्फ 55 अलाउंस रखे गए हैं. इसी बात से केंद्रीय कर्मचारी नाराज़ हैं.

केंद्रीय कर्मचारियों की आपत्ति के चलते सरकार ने तीन समितियों का गठन किया था. इन समितियों को कर्मचारियों के प्रतिनिधियों से बातचीत करके आम राय बनानी थी.

रिपोर्ट की माने तो, सरकार ने ट्रांस्पोर्ट अलाउंस को दो हिस्सों में बांटा है. एक सीसीए और दूसरा पहले की तरह दिया जाने वाला टीए है. यह पांचवें वेतन आयोग के जैसा होगा, ऐसा माना जा रहा है. यह भी कहा जा रहा है कि समिति ने कर्मचारियों की मांग को मानते हुए एचआरए की दर को छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट के हिसाब से देने की बात को स्वीकार कर लिया है.

नरेंद्र मोदी सरकार ने 2016 में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को मंजूरी दी थी और जनवरी 2016 से 7वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लागू किया था. लेकिन, भत्तों के साथ कई मुद्दों पर असहमति होने की वजह से इन सिफारिशें पूरी तरह से लागू नहीं हो पाईं.

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