संवादसूत्र, बाजारशुकुल : पिछले कई साल से बगैर मान्यता के दर्जन भर स्कूल चल रहे हैं। संचालकों पर विभाग का कोई नियम कानून नहीं चलता। यह तरीके से फीस वसूल रहे हैं।

इतना ही नहीं इनमें सरकार की छुट्टी का हो या फि र स्कूल खुलने का आदेश कोई मायने नहीं रखता है। इन स्कू लों में मात्र प्रबंधक का आदेश ही चलता है। विद्यालय में पंजीकृत छात्र हर माह इनके शोषण का शिकार होता है।

सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क न लेकर विद्यालय पर बंधक मनमाना शुल्क ले रहे हैं। पूरे साल कोई न कोई बहाना बनाकर छात्रों से धन उगाही करना इनकी परम्परा में शामिल हो गया है। बगैर मान्यता के चल रहे दर्जनों विद्यालयों में आज तक वार्षिक परीक्षाएं नहीं हुई हैं। इन विद्यालयों में न तो कोई पुस्तकालय है न ही कोई प्रयोगशाला फिर भी यहां छात्रों के सर्वागीण विकास का दावा करते कभी भी देखा जा सकता है।

जैसे-जैसे नए सत्र का आगाज हो रहा है इन विद्यालयों की दुकानें सजना शुरू हो गई हैं। ये स्कूल संचालक अभिभावकों से तरह-तरह के वायदे कर अपनी धोखे की दुकान सजाकर उनका आर्थिक दोहन कर रहे हैं। फ र्जी मान्यता के सहारे स्कूल चलाने वाले सुविधा के नाम पर अभिभावकों का शोषण कर रहे हैं।

क्षेत्र में दर्जनों इंटर कालेज व प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय विभाग के नियमों कानूनों को धता बताते हुए संचालित हो रहे है।

ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के सरकारी आदेश के बाद भी उच्च अधिकारियों ने अब तक यहां स्कूलों का न तो भ्रमण किया है न ही इनके खिलाफ कोई कार्रवाई ही हुई है। इनके खिलाफ कब तक अभियान चलेगा इस बात की जानकारी के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक डा. ओपी मिश्र के सीयूजी नंबर पर बात करने का प्रयास किया गया किन्तु बात नहीं हो सकी।

एक टिप्पणी भेजें

 
Top