जासं, आगरा: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) के बर्खास्त चेयरमैन अनिल यादव का अधिकारियों पर जबरदस्त प्रभाव था।चहेतों ने हिस्ट्रीशीट के साथ तीन थानों के अपराध रजिस्टर के पेज फाड़कर उनके गुनाहों को मिटाने का प्रयास किया। जागरण ने खुलासा किया, तो स्थानीय स्तर पर जांच में इसकी पुष्टि हो गई, मगर जिम्मेदार पुलिस अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

अब फिर से मामला सुर्खियों में आने पर रिपोर्ट तलाशी जा रही है। कमला नगर के निवासी अनिल यादव यूपीपीएससी चेयरमैन के पद से हटाए जाने के बाद सुर्खियों में आए।

हाईकोर्ट ने उनका आपराधिक इतिहास तलब किया, लेकिन पुलिस ने पेश नहीं किया। इसके बाद जागरण ने अनिल यादव का आपराधिक इतिहास प्रकाशित किया था।

तत्कालीन एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह ने मामले की जांच की, तो तमाम चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक भी अनिल यादव के खिलाफ मारपीट, बलवा और चौथ वसूली से लेकर डकैती तक के मुकदमे दर्ज हैं। अभ्यस्त अपराधी होने पर न्यू आगरा पुलिस ने अनिल यादव के खिलाफ 1985 में अपराध संख्या 353 पर 3 यूपी गुंडा एक्ट की कार्रवाई की।

इसके बाद 1990 में हिस्ट्रीशीट संख्या 14 ए खोल दी। रिपोर्ट के मुताबिक अपराध की दुनिया से राजनीतिक पहुंच बनाने के बाद अनिल यादव के आपराधिक इतिहास पर पर्दा डाल दिया गया। थाने के अपराध रजिस्टर में आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। इसमें केवल धाराएं थी।

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