नई दिल्ली, प्रेट्र : छात्र जीवन में एक वर्ष बेकार जाने का उसके पेशेवर संभावनाओं पर असर पड़ता है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग (एनसीडीआरसी) ने राजस्थान के एक शिक्षण संस्थान को 50,000 रुपये मुआवजा भरने का आदेश देते हुए यह कहा। शिक्षण संस्थान ने एक छात्र को स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) देने से मना कर दिया था।

इस कारण छात्र कॉलेज में नामांकन नहीं करा सकी और पढ़ाई में एक वर्ष पिछड़ गई।आयोग ने राजस्थान के झुनझुनू में स्थित झुनझुनू अकादमी को बन्ने सिंह शेखावत को मुआवजे की राशि सौंपने का आदेश दिया है। शेखावत की बेटी को स्कूल ने 2013 में स्थानांतरण प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया था। इससे उनकी बेटी को कॉलेज में 2013-14 सत्र के दौरान एक वर्ष का नुकसान हुआ था।

एनसीडीआरसी के पीठासीन सदस्य अजित भरिहोक की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हर शिक्षण संस्थान नामांकन से पहले चरित्र प्रमाण पत्र/टीसी लेते हैं। इसलिए यह स्पष्ट है कि अकादमी के गलत काम से याची की बेटी 2013-14 में नामांकन नहीं करा सकी। इसका असर छात्र के रोजगार और प्रोन्नति पर पड़ेगा।’

शेखावत के मुताबिक, उनकी बेटी 2013 में 12वीं की परीक्षा पास कर गई थी। स्कूल ने प्रमाण पत्र जारी करने से पहले 10,000 रुपये की मांग की। जबकि कोई शुल्क बकाया नहीं था।

प्रमाण पत्र जारी नहीं करने से उनकी बेटी का कॉलेज में नामांकन नहीं हो पाया।नई दिल्ली, प्रेट्र : छात्र जीवन में एक वर्ष बेकार जाने का उसके पेशेवर संभावनाओं पर असर पड़ता है। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग (एनसीडीआरसी) ने राजस्थान के एक शिक्षण संस्थान को 50,000 रुपये मुआवजा भरने का आदेश देते हुए यह कहा। शिक्षण संस्थान ने एक छात्र को स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) देने से मना कर दिया था। इस कारण छात्र कॉलेज में नामांकन नहीं करा सकी और पढ़ाई में एक वर्ष पिछड़ गई।

आयोग ने राजस्थान के झुनझुनू में स्थित झुनझुनू अकादमी को बन्ने सिंह शेखावत को मुआवजे की राशि सौंपने का आदेश दिया है। शेखावत की बेटी को स्कूल ने 2013 में स्थानांतरण प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया था। इससे उनकी बेटी को कॉलेज में 2013-14 सत्र के दौरान एक वर्ष का नुकसान हुआ था।

एनसीडीआरसी के पीठासीन सदस्य अजित भरिहोक की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘हर शिक्षण संस्थान नामांकन से पहले चरित्र प्रमाण पत्र/टीसी लेते हैं। इसलिए यह स्पष्ट है कि अकादमी के गलत काम से याची की बेटी 2013-14 में नामांकन नहीं करा सकी। इसका असर छात्र के रोजगार और प्रोन्नति पर पड़ेगा।’

शेखावत के मुताबिक, उनकी बेटी 2013 में 12वीं की परीक्षा पास कर गई थी। स्कूल ने प्रमाण पत्र जारी करने से पहले 10,000 रुपये की मांग की। जबकि कोई शुल्क बकाया नहीं था। प्रमाण पत्र जारी नहीं करने से उनकी बेटी का कॉलेज में नामांकन नहीं हो पाया।

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