धर्मेश अवस्थी, इलाहाबाद बीटीसी का नया नाम डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन) के वर्ष और सत्र का ‘संगम’ इस साल भी होने के आसार नहीं है। लेटलतीफ चल रहे सत्र को तमाम प्रयासों के बाद पटरी पर नहीं लाया जा सका। अफसरों के सभी प्रयास असफल होने पर सर्वोच्च न्यायालय ने सत्र नियमित करने की पहल की। कोर्ट ने कब आवेदन लिया जाए और कब से पढ़ाई शुरू हो इसका कार्यक्रम भी भेजा।

उसे हर हाल में 2017 में पटरी पर लाने की योजना बनी, लेकिन अभी 2016 के प्रवेश शुरू नहीं हो सके हैं।1डीएलएड कोर्स करने वाले प्रशिक्षु कब शिक्षक बनेंगे यह भविष्य के गर्भ में है। नौकरी मिलना तो दूर की बात है इस कोर्स का सत्र तक नियमित नहीं है।

2013 का सत्र शुरू करने के समय निजी कालेजों की एकाएक संख्या बढ़ने और फिर उनकी सीटों को भरने में जो आपाधापी मची उससे महकमा चार साल बाद भी उबर नहीं पाया है। देरी होने से आगे के सत्रों का समय भी खिसकता चला गया।

इसका नतीजा यह है कि 2016 सत्र में प्रवेश की प्रक्रिया पिछले माह शुरू हो सकी है।
यह है शीर्ष कोर्ट आदेश :
पूर्व के बीटीसी सत्र को नियमित करने के लिए शीर्ष कोर्ट ने बाबा शिवनाथ सिंह शिक्षण व प्रशिक्षण संस्थान बनाम नेशनल काउंसिलिंग फॉर टीचर एजूकेशन व अन्य के संबद्ध 10 अन्य याचिकाओं की सुनवाई करते हुए आठ सितंबर 2015 को आदेश दिया कि बीटीसी 2014 सत्र का प्रवेश पूरा करते हुए 22 सितंबर से कक्षाएं शुरू की जाएं।

इस आदेश के बाद तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने कई बार डायट के प्राचार्यो को पत्र लिखा, लेकिन प्रवेश कई माह बाद तक जारी रहा। कई संस्थानों में विज्ञापन जारी करके दिसंबर तक सीटें भरी गईं।
आगे के सत्रों की गाइड लाइन :
शीर्ष कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि 2015 का सत्र 22 सितंबर, 2016 से शुरू किया जाएगा। इसके लिए आवेदन लेने की प्रक्रिया की संभावित तारीख अप्रैल 2016 तय की गई, ताकि सारी सीटें जुलाई तक भर ली जाएं। 2016 सत्र का निर्देश हुआ, लेकिन यह भी विलंब से चल रहा है।
जुलाई चल रहा है अभी 2016 सत्र में प्रवेश नहीं हो पाये हैं।
2017 से सत्र हो नियमित :
कोर्ट ने कहा कि 2017 का बीटीसी सत्र एक जुलाई 2017 से शुरू होगा और इसके लिए आवेदन फरवरी 2017 से लिए जाएंगे।
इस वर्ष विधानसभा चुनाव के कारण सत्र शुरू करने की अनुमति लेने और ऑनलाइन काउंसिलिंग आदि करने के कारण देरी हुई है। अगले महीनों में 2017 सत्र के लिए प्रवेश शुरू हो पाएंगे इसके आसार नहीं है, क्योंकि परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय को टीईटी के साथ ही अन्य तमाम परीक्षाएं कराना है।’

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