राज्य ब्यूरो, लखनऊ योगी सरकार ने अपने पहले बजट में परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को जरूर सौगातें दी हैं लेकिन लैपटॉप पाने की हसरत लिए कॉलेज में दाखिला लेने वाले नवजवान छात्र-छात्रओं को निराश किया है।

बजट में योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को मुफ्त में एक जोड़ी जूता, दो जोड़ी मोजा और एक स्वेटर उपलब्ध कराने के लिए 300 करोड़ रुपये का इंतजाम किया है। वहीं परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को स्कूल बैग मुहैया कराने के लिए 100 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है ।

स्नातक तक सभी लड़कियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के मकसद से अहिल्याबाई निश्शुल्क शिक्षा योजना का बजट में एलान किया है। इस योजना के लिए बजट में 21.12 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं।

भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में कॉलेज में दाखिला लेने वाले छात्रों को लैपटॉप देने का एलान किया था लेकिन बजट में उसने इस वादे पर चुप्पी साध ली है। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा में सर्वोच्च अंक पाने वाले एक-एक छात्र व छात्र को स्नातकोत्तर तक शिक्षा हासिल करने के लिए आधार लिंक्ड बैंक खाते के माध्यम से प्रतिमाह 2000 रुपये का वजीफा देने का भी सरकार ने फैसला किया है।

इसके लिए दीनदयाल उपाध्याय विशेष छात्रवृत्ति योजना शुरू की जाएगी जिसकी खातिर बजट में 0.48 लाख रुपये का इंतजाम किया गया है।

प्रदेश में शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े विकासखंडों में 166 पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेजों के लिए 25 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। राज्य विश्वविद्यालयों तथा सभी राजकीय व अशासकीय सहायताप्राप्त कॉलेजों में मुफ्त वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए 50 करोड़ रुपये का इंतजाम किया गया है। बलिया में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए पांच करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं।

प्रतापगढ़ में राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के निर्माण के लिए चार करोड़ और मीरजापुर के लिए आठ करोड़ रुपये का बजट आवंटन हुआ है।

ऐसे किया सरकार ने कर्जमाफी का इंतजाम, :

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बेशक कह रहे हों कि किसानों की कर्जमाफी के लिए 36 हजार करोड़ रुपये का इंतजाम शासन की फिजूलखर्ची पर अंकुश लगाकर किया गया है लेकिन, इसके अन्य कारण भी हैं।

पिछले साल प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 12,47,658 करोड़ रुपये था जो इस साल बढ़कर 14,45,770 करोड़ रुपये हो गया। जीएसडीपी की अधिकतम तीन फीसद की सीमा तक राज्य सरकार कर्ज ले सकती है।

जीएसडीपी का आकार बढ़ने से राज्य सरकार के हाथ कुछ खुल गए हैं और इस साल 55 हजार करोड़ रुपये की सीमा तक कर्ज ले सकती है।

एक टिप्पणी भेजें

 
Top