◆ शासन ने सभी जिलाधिकारी और एसएसपी को दिए निर्देश, दिल्ली से सटे जिलों में बरती जाए खास सतर्कता

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : त्योहारों पर आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण के दृष्टिगत सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा।

शासन ने इसके लिए सभी डीएम व एसएसपी/एसपी को पटाखों की बिक्री नियमों के दायरे में कराए जाने का आदेश दिया है। सचिव भगवान स्वरूप ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के 12 सितंबर को दिए गए आदेश का अनुपालन कराने के लिए शासन ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

दिल्ली क्षेत्र से जुड़े बागपत, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ, गौतमबुद्धनगर व मुजफ्फरनगर में पटाखा विक्रेताओं को वर्ष 2017 में मिली अनुमति के तहत 50 प्रतिशत मात्र तक ही पटाखे रखने व बेचने की अनुमति होगी।

पटाखों पर विस्फोटक का नाम, निर्माणकर्ता का नाम, विस्फोटक का शुद्ध भार सहित अन्य प्रमुख जानकारियों का उल्लेख जरूरी होगा।

आतिशबाजी को अज्वलनशील सामग्री से बने शेड में रखा जाएगा और वह पूरी से बंद व सुरक्षित होगा। आतिशबाजी रखने व बिक्री के शेड एक-दूसरे से कम से कम तीन मीटर की दूरी पर और सुरक्षित कार्य से 50 मीटर की दूरी पर होंगे।

शेड एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं होंगे। इन शेडों की सुरक्षित दूरी के भीतर तेल व गैस से जलने वाले लैंप व खुली बत्तियों का प्रयोग नहीं होगा। यदि विद्युत बत्तियों का प्रयोग किया जाएगा तो उन्हें दीवार अथवा छप पर फिक्स करना होगा।

प्रत्येक दुकान के स्विच को दीवार पर फिक्स किया जाएगा। एक समूह में पचास से अधिक दुकानों की अनुमति की जाएगी। दिल्ली क्षेत्र से जुड़े जिलों सहित पूरे प्रदेश में ध्वनि प्रदूषण नियत के तहत घोषित साइलेंस जोन (अस्पताल, नर्सिग होम, प्राथमिक एवं जिला हेल्थ केयर सेंटर, शैक्षणिक संस्थान, न्यायालय, धार्मिक स्थल व अन्य घोषित क्षेत्र) के 100 मीटर के भीतर पटाखे न फोड़े जाएं।

स्कूलों में बच्चों को पटाखों के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जाए और इसके प्रति संवेदनशील बनाया जाए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, बड़े निजी अस्पताल, सीएमओ व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक आतिशबाजी के संबंध में परामर्श जारी करें

जिसका जिला सूचना अधिकारी के जरिये व्यापक प्रचार-प्रसार कराया जाए। विस्फोटक अधिनियम 1884 व विस्फोटक नियम 2008 के सभी प्रावधान का सख्ती से अनुपालन कराए जाने का निर्देश दिया गया है।

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