राज्य ब्यूरो, इलाहाबाद, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा में कई अहम घोषणाओं को धरातल पर उतारा जाना है। सरकार की योजनाओं को अमल में लाने के लिए दोनों विभागों में नियमित अफसर नहीं हैं, जो फिलहाल कार्यरत हैं उनमें कई रिटायर होने वाले हैं।

ऐसे में कार्यवाहक अफसर ही जैसे-तैसे शिक्षा की गाड़ी दौड़ाएंगे। सूबे की नई सरकार ने विभागीय पदोन्नति के लिए कई बार गोपनीय सूचनाएं भी मंगाई हैं लेकिन, प्रमोशन नहीं हो पा रहा है, जबकि मुख्य सचिव इस संबंध में आदेश भी जारी कर चुके हैं।

शिक्षा विभाग में जून में हुए नियमित फेरबदल के दौरान ही अफसरों की कमी सामने आ गई थी। इसीलिए तमाम मंडलों में कार्यवाहक संयुक्त शिक्षा निदेशकों की तैनाती की गई, साथ ही कार्यवाहक अफसरों दो-दो मंडलों का काम सौंपा जा चुका है।

शासन ने संयुक्त शिक्षा निदेशकों की डीपीसी करके कमी पूरा करने का प्रयास किया लेकिन, समस्या बरकरार है। ऐसे ही हालात अपर शिक्षा निदेशक स्तर पर होने वाले हैं। प्रदेश में अपर शिक्षा निदेशक के 12 पद हैं। अभी तक नौ अपर निदेशकों से किसी तरह से काम चलाया जा रहा था।

अक्टूबर में दो अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डा. रमेश व एडी महिला शैल यादव सेवानिवृत्त होंगी। इसके बाद शिक्षा निदेशालय में सिर्फ अपर शिक्षा निदेशक बेसिक विनय कुमार पांडेय ही बचेंगे।

ऐसे में सिर्फ छह अपर शिक्षा निदेशक बेसिक व माध्यमिक में होंगे। इनमें से तीन लखनऊ व तीन इलाहाबाद में होंगे। यह हालात तब हैं जब एक अपर शिक्षा निदेशक ने शासन से वीआरएस स्वीकृत करा लिया, बाद में उसे लेने से इन्कार कर दिया।

अपर शिक्षा निदेशक नीना श्रीवास्तव के पास यूपी बोर्ड की सचिव और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उप्र के सचिव का दोहरा प्रभार है। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियां शुरू हो गई हैं और चयन बोर्ड का विलय होना है ऐसे में उनके लिए आगे दोहरी जिम्मेदारी निभाना बेहद कठिन होगा। इसी तरह से उप शिक्षा निदेशक व जिला विद्यालय निरीक्षकों का भी हाल है।

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