प्रतापगढ़ : साक्षर भारत योजना की मियाद 30 सितंबर को समाप्त हो रही है। ऐसे में इस योजना से जुड़े दो हजार से अधिक संविदाकर्मी पैदल हो जाएंगे। इनका कई माह का मानदेय भी अधर में लटक जाएगा। इसको लेकर संविदा कर्मी मायूस हैं।

भारत सरकार ने वर्ष 2010 में शुरू किया था। जिले में योजना को अमली जामा वर्ष 2011 से पहनाया जा सका। बाद में इस योजना को 12वीं पंचवर्षीय योजना का हिस्सा बना दिया गया। योजना में 15 वर्ष से अधिक की आयु के निरक्षरों को साक्षर करना था।

साल में दो बार उनके लिए परीक्षा भी आयोजित करना पड़ता था। योजना के सफल संचालन के लिए जिले के सभी 1052 ग्राम पंचायतों के प्राइमरी स्कूलों में साक्षरता केंद्र बना कर प्रत्येक पर दो प्रेरकों को नियुक्त किया गया था। ब्लाक स्तर पर ब्लाक समन्वयक तथा जनपद स्तर पर दो जिला समन्वयक की नियुक्ति की गई। प्रेरकों को दो हजार रुपये तथा ब्लाक समन्वयकों व जिला समन्वयकों को छह हजार मानदेय दिया जा रहा था।

वर्तमान में प्रतापगढ़ जिले में कुल 2002 प्रेरक, 15 ब्लाक समन्वयक तथा दो जिला समन्वयक तैनात हैं। पूर्व में यह योजना मार्च 2017 में समाप्त होनी थी, लेकिन भारत सरकार ने इस योजना को छह माह का विस्तार देते हुए 30 सितंबर तक संचालित करने का निर्देश दिया था। 30 सितंबर के बाद से बंद हो रही योजना के बाद यह सभी संविदा कर्मी नौकरी से बाहर हो जाएंगे। इन्हें कभी भी नियमित रूप से मानदेय नहीं दिया गया। यही कारण है कि वर्तमान में 33 माह का मानदेय प्रेरकों का बकाया है।

इसी सप्ताह सिर्फ चार माह का ब्लाक समन्वयकों का तथा पांच माह का प्रेरकों के मानदेय के लिए 20 करोड़ रुपये शासन से प्राप्त हुआ है। उसे गुरुवार को खातों में भेजे जाने की कार्रवाई की गई। जिला समन्वयक संदीप तिवारी व मनोज मिश्र ने बताया कि अभी भी प्रेरकों का 28 माह का तथा समन्वयकों का 4 माह का मानदेय बकाया है। 30 सितंबर से योजना का संचालन भारत सरकार बंद कर रही है। ऐसे में सभी संविदा कर्मियों का बकाया मानदेय दिया जाना चाहिए।

केंद्र सरकार ने साक्षर भारत योजना को 30 सितंबर तक चलाने की अनुमति दी थी। राज्य साक्षरता मिशन के निदेशक अवध नरेश शर्मा ने लोक शिक्षा समिति के सचिवों को दिए गए निर्देश में कहा है कि 30 सितंबर के बाद योजना के संचालन के लिए केंद्र सरकार से कोई निर्देश नहीं आया है। इस कारण प्रेरकों, ब्लाक समन्वयकों व जिला समन्वयकों का नवीनीकरण न किया जाए। इसके बाद शासन का जो निर्देश मिलेगा, उसके अनुसार कार्य किया जाएगा। बकाया मानदेय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

नियुक्ति के बाद से नहीं मिला मानदेय :
प्रतापगढ़ : साहब मुझे नियुक्ति के बाद से कोई मानदेय नहीं मिला है। हेडमास्टर ने हस्ताक्षर कर दिया है लेकिन ग्राम प्रधान हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। यह फरियाद गुरुवार को दोपहर बीएसए के पास पहुंची मंगरौरा विकास खंड के पूरब पट्टी की प्रेरक सीतादेवी पुत्री कृष्ण कुमार सरोज ने की। उसने बताया कि उसकी नियुक्ति 22 दिसंबर 2011 को हुई थी। तब से अब तक उसे मानदेय नहीं मिल सका। बीएसए ने कहा कि ब्लाक समन्वयक व खंड शिक्षाधिकारी से लिखवाकर दे तभी उसको मानदेय मिल सकता है।

मानदेय को कई बार किया आंदोलन :
प्रतापगढ़ : साक्षर भारत योजना से जुड़े प्रेरकों, ब्लाक समन्वयकों और जिला समन्वयकों ने कई बार मानदेय पाने के लिए आंदोलन किया। इसके बावजूद उनकी आवाज को नहीं सुना गया। काफी प्रयास के आंशिक रूप से मानदेय का पैसा आया।

एक टिप्पणी भेजें

 
Top